Monday, March 29, 2010
तेरी भाषा
तेरी भाषा मैं क्या जाणु रे !
तू गौरी, मैं श्यामल
तेरी आँखे काला बादल,
नैनों में सावन , मैं रोऊ कैसे रे !
तेरी भाषा मैं क्या जाणु रे !
तेरी चुनर कोरी धान, मैं नहीं रंग या बहार ,
तू सुन्दर रागिनी, मैं कोरा वाद ,
सुर की नदिया, तू सुन्दर गान ,
प्रीत राह संकीर्ण, मैं चलूँ कैसे रे !
तेरी भाषा मैं क्या जाणु रे !
निपट गंवार कोरा फकीर ,
वस्त्र जाने किट , शरीर कंकाल ,
चंचल तू चित पावन , नयन अलख ,
विधि बहूत महान कैसे लडू रे !
तेरी भाषा मैं क्या जाणु रे !
तू फिर कोई साज कर ,
गहन पहन वीणा से मधुर वाद कर ,
ह्रदय कोई तो धड्केगा, कर्ण कोई तडपेगा ,
वो देख मस्त नर्त्य में लीन रे !
तेरी भाषा तेरा प्रियतम, वो जल तू मीन रे !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment